देश की दूसरी सबसे बड़ी IT सर्विसेज कंपनी इंफोसिस ने दूसरी तिमाही में ₹49,244 करोड़ का रेवेन्यू किया है। ये पिछले साल इसी समय हुए ₹44,490 करोड़ के रेवेन्यू से 11% ज्यादा है।
कमाई बढ़ने के साथ ही कंपनी का मुनाफा भी 6% बढ़ा है। इस तिमाही में इंफोसिस को ₹7,823 करोड़ का मुनाफा हुआ है, जो बीते साल इसी अवधि में ₹7,364 करोड़ रहा था।
इंफोसिस के रेवेन्यू में मजबूती का मुख्य कारण 5.2 बिलियन डॉलर यानी करीब 50 हजार करोड़ रुपए की रिकॉर्ड बड़ी डील्स का मिलना है। इसमें 62% नए बिजनेस से आए और एक 2 बिलियन डॉलर यानी करीब 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की मेगा-डील शामिल है।
इसके साथ ही रेवेन्यू बढ़ने की वजह AI सर्विसेज की मांग में आया 29% का बड़ा उछाल है। इससे कंपनी की कुल कमाई में AI का योगदान बढ़कर 10.5% हो गया है।
हर शेयर पर 26 रुपए डिविडेंड देगी कंपनी
कंपनी निवेशकों को हर शेयर पर ₹26 डिविडेंड भी देगी। कंपनियां अपने शेयरहोल्डर्स को मुनाफे का कुछ हिस्सा देती हैं, उसे डिविडेंड कहते हैं। वहीं इंफोसिस का शेयर आज लगभग फ्लैट 1154 रुपए पर बंद हुआ। इस साल ये 29% से ज्यादा गिर चुका है।
इस दौरान निफ्टी 50 में करीब 13% की गिरावट आई है, यानी इंफोसिस का प्रदर्शन बाजार के मुकाबले काफी कमजोर रहा है। इंफोसिस का मार्केट कैप लगभग ₹4.78 लाख करोड़ है।
दूसरी तिमाही में 4,480 नए कर्मचारी हायर किए
इंफोसिस ने जुलाई से सितंबर के बीच यानी दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में 4,480 नए कर्मचारी हायर किए हैं। अब कंपनी में काम करने वाले कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 3,32,542 हो गई है। पिछली तिमाही (Q1) में 532 कर्मचारी कम हुए थे, जिससे इस साल की पहली छमाही (H1) में कुल 3,948 कर्मचारी जुड़े हैं।
नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की दर यानी एट्रिशन रेट थोड़ा घटकर 12.7% रहा है, जो पहले 13% था। इस तिमाही (Q2) में इंफोसिस ने कॉलेज से पास-आउट हुए 8,000 से ज्यादा नए फ्रेशर्स को नौकरी दी है।
कंपनी ने इस पूरे साल में कुल 20,000 नए फ्रेशर्स को नौकरी देने का टारगेट रखा है। पहली छमाही (H1) में कंपनी 12,000 से ज्यादा नए युवाओं को नौकरी देकर अपने टारगेट का आधे से ज्यादा हिस्सा पूरा कर चुकी है।
कंपनी ने रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान घटाया
कंपनी ने बेहतर तिमाही नतीजों के बावजूद इस वित्त वर्ष के लिए अपनी रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान घटाकर 1-2% कर दिया है, जो पहले 1.5-3% था। CFO जयेश संघराजका के मुताबिक, बाजार में कड़े कॉम्पिटिशन, ग्राहकों द्वारा सस्ती दरों और ज्यादा प्रोडक्टिविटी की मांग के कारण यह फैसला लेना पड़ा है।
इसके अलावा, AI के तेजी से बढ़ते असर की वजह से भारतीय IT सेक्टर के पुराने बिजनेस मॉडल पर दबाव पड़ रहा है और ग्राहकों से मिलने वाली फीस अब काम के घंटों के बजाय तकनीक से होने वाली उत्पादकता से तय हो रही है।
CFO बोले- खर्चों पर कंट्रोल की वजह से मुनाफा स्थिर
कमाई की मजबूती (ऑपरेटिंग मार्जिन): बाजार में काफी उतार-चढ़ाव के बावजूद दूसरी तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 21.0% रहा। खर्चों पर कंट्रोल और समझदारी से काम करने की वजह से मुनाफा स्थिर बना हुआ है।
बचा हुआ नकद पैसा (फ्री कैश फ्लो): कंपनी के पास 928 मिलियन डॉलर यानी 8,806 करोड़ रुपए का फ्री कैश फ्लो आया, जो कुल नेट प्रॉफिय यानी शुद्ध मुनाफे का 113.3% है। यह कंपनी की मजबूत आर्थिक स्थिति को दिखाता है।
शेयरधारकों को फायदा (डिविडेंड): बोर्ड ने निवेशकों के लिए 26 रुपए प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 13% ज्यादा है।
इंफोसिस के नतीजों पर एक्सपर्ट्स की राय
रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ना यह दर्शाता है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक आर्थिक माहौल के बावजूद इंफोसिस की ग्रोथ पटरी पर है।
डिविडेंड देने के फैसले को एक्सपर्ट्स ने पॉजिटिव माना है, जिससे रिटेल और बड़े निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और क्लाउड सर्विसेज के नए ऑर्डर्स के कारण कंपनी की ऑर्डर बुक लगातार मजबूत बनी हुई है।
इन नतीजों से आईटी सेक्टर के प्रति निवेशकों का नजरिया बेहतर होगा और आने वाले दिनों में शेयर में तेजी दिख सकती है।
कंपनी की मजबूत सेहत के 5 संकेत
रेवेन्यू- कमाई लगातार बढ़ रही हो।
एक्सपेंस -खर्च की बढ़त सेल्स की तुलना में धीमी हो।
प्रॉफिट - मुनाफा लागातार बढ़ रहा हो।
EBITDA -सेल्स के साथ-साथ यह भी बढ़े।
EPS में बढ़ोतरी हो।
फ्री कैश फ्लो पॉजिटिव और बढ़ रहा हो
नारायण मूर्ति ने 1981 में की थी कंपनी की शुरुआत
इंफोसिस एक बड़ी भारतीय आईटी कंपनी है, जो 1981 में बैंगलोर में शुरू हुई। ये कंसल्टिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, क्लाउड और AI जैसी सर्विसेज देती है और दुनिया भर में 3 लाख से ज्यादा एम्प्लॉई हैं। कंपनी के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर सलील पारेख है।
इंफोसिस को 1981 में नारायण मूर्ति ने छह साथियों के साथ शुरू किया था। नंदन नीलकेणी, क्रिस गोपालकृष्णन, एस.डी. शिबुलाल, के. दिनेश, एन.एस. राघवन और अशोक अरोड़ा। मूर्ति को इसका मुख्य फाउंडर माना जाता है। ये सिर्फ 250 डॉलर से शुरू हुई थी।