भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की बिकवाली का सिलसिला अक्टूबर के महीने में भी जारी रहा। अक्टूबर में FPIs ने भारतीय इक्विटी बाजार से कुल ₹34,843 करोड़ निकाल लिए हैं।
यह लगातार दूसरा महीना है जब विदेशी निवेशकों ने बाजार में भारी बिकवाली की है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, दुनिया भर में ऊंची ब्याज दरें और कंपनियों के सुस्त तिमाही नतीजों के अनुमान के चलते विदेशी निवेशकों का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ है।
हालांकि, अक्टूबर के आखिरी हफ्ते (26-30 अक्टूबर) के दौरान विदेशी निवेशकों ने रुख बदलते हुए बाजार में ₹6,300 करोड़ का नेट यानी शुद्ध निवेश किया, जबकि इससे पिछले हफ्ते (23 अक्टूबर को खत्म हुए सप्ताह) में उन्होंने ₹2,700 करोड़ की बिकवाली की थी।
2026 में अब तक ₹2.95 लाख करोड़ की बिकवाली
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर से पहले सितंबर महीने में भी विदेशी निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से ₹35,861 करोड़ निकाले थे। इससे पहले जुलाई में ₹20,200 करोड़ और अगस्त में ₹29,631 करोड़ का नेट निवेश आया था।
अक्टूबर की नई बिकवाली को मिलाकर, साल 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी बाजार से FPIs का कुल आउटफ्लो ₹2.95 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है।
विदेशी निवेशकों की 2026 में इस बिकवाली के बीच सेंसेक्स करीब 13% (10,729 अंक) और निफ्टी 12% (3,093 अंक) गिरा है।
4 में से 3 ट्रेडिंग सेशन में खरीदार रहे विदेशी निवेशक
अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में आए सुधार से बाजार का शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट तो बेहतर हुआ है, लेकिन बाजार जानकारों का कहना है कि सिर्फ एक हफ्ते की खरीदारी को ट्रेंड में स्थायी बदलाव (रिवर्सल) नहीं माना जा सकता।
कैश मार्केट में 30 अक्टूबर को खत्म हुए आखिरी चार कारोबारी सेशन में से तीन में FPIs नेट खरीदार रहे। इससे भारतीय शेयरों को लेकर विदेशी निवेशकों के नजरिए में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स से मिल रहा सपोर्ट
अक्टूबर के आखिरी हफ्तों में विदेशी निवेशकों की तरफ से आई खरीदारी के दम पर निफ्टी एक बार फिर 23,000 का स्तर पार करने में कामयाब रहा।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, FPIs की लगातार जारी बिकवाली के बावजूद डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। DIIs ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को संभाला और बाजार में स्थिरता बनाए रखी।
फार्मा, हेल्थकेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म शेयर्स में खरीदारी
अक्टूबर महीने में विदेशी निवेशकों की पसंद और नापसंद में साफ अंतर देखा गया। एक तरफ जहां FPIs ने लार्ज-कैप फाइनेंशियल (बैंकिंग और वित्तीय) शेयरों में बिकवाली जारी रखी, वहीं दूसरी तरफ वे चुनिंदा फार्मास्युटिकल (दवा), हेल्थकेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों के शेयरों में खरीदारी करते दिखे।
बिकवाली और खरीदारी के पीछे के 5 प्रमुख कारण
कच्चे तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के ऊंचे दाम भारत में महंगाई और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और यूएस फेड: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड की दरों के चलते ग्लोबल कैपिटल वहां शिफ्ट हो रही है। हालांकि, यूएस फेड के ब्याज दरें स्थिर रखने के फैसले से थोड़ा सहारा मिला।
आकर्षक वैल्युएशन: बिकवाली के कारण भारतीय लार्ज-कैप शेयरों के दाम आकर्षक स्तर पर आ गए हैं।
घरेलू आर्थिक ग्रोथ: भारत की मजबूत आर्थिक ग्रोथ के संकेतों ने विदेशी निवेशकों के सेंटिमेंट में पॉजिटिव बदलाव किया।
ग्लोबल AI ट्रेड में सुस्ती: ग्लोबल लेवल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े ट्रेड्स में आई सुस्ती ने भी विदेशी निवेशकों के पोर्टफोलियो एलोकेशन को प्रभावित किया।
एक्सपर्ट्स की राय: कच्चे तेल के दाम और अमेरिकी चुनावों पर रहेगी नजर
मीरा मनी के को-फाउंडर आनंद के. राठी के मुताबिक, अक्टूबर महीने के दौरान विदेशी बिकवाली काफी ज्यादा रही है, जो क्रूड ऑयल, वैश्विक ब्याज दरों और कंपनियों के नतीजों को लेकर अनिश्चितता को दर्शाती है।
विदेशी फंड्स का आगे टिकाऊ रहना ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक परिस्थितियों, कच्चे तेल के दाम और कंपनियों की कमाई के आउटलुक पर निर्भर करेगा।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट वी. के. विजयकुमार ने बताया कि आकर्षक वैल्युएशन और यूएस फेड के फैसले ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
वहीं बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पवित्र मुखर्जी ने कहा कि FPIs का वापस लौटना बाजार के लिए पॉजिटिव है, लेकिन क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी को सीमित कर सकती हैं।
आने वाले हफ्ते में अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव, ब्रेंट क्रूड, अमेरिका-ईरान व रूस-यूक्रेन संघर्ष और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी।
FPI क्या होता है और बाजार पर इसका क्या असर पड़ता है?
क्या है FPI: फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टमेंट यानी FPI का मतलब है विदेशी निवेशकों का किसी देश के शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या बॉन्ड में किया जाने वाला निवेश।
बाजार पर असर: जब FPIs भारतीय बाजार में पैसा लगाते हैं, तो शेयर बाजार में तेजी आती है और भारतीय रुपया मजबूत होता है। वहीं जब वे पैसा निकालते हैं, तो बाजार में गिरावट और रुपए में कमजोरी देखी जाती है।
शेयर बाजार में आज यानी 30 अक्टूबर को तेजी रही। सेंसेक्स 308 अंक की तेजी के साथ 74,459 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी 116 अंक की तेजी रही। ये 23,053 के स्तर पर बंद हुआ। IT और फार्मा शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी रही।