First Dolby Cinema in Keralam: भारत के पांचवें और केरल के पहले डॉल्बी सिनेमा की शुरुआत कोच्चि के फोर्ट कोच्चि में मौजूद EVM सिनेमाज में हुई है। जानकारी के अनुसार, एक नए ऑडिटोरियम में डॉल्बी की विजुअल और साउंड तकनीक को जोड़ा गया है। इससे बड़े पर्दे पर फिल्म देखने का दर्शकों का एक्सपीरियंस बदल जाएगा। डॉल्बी लेबोरेटरीज ने बताया है कि 450 सीटों वाले डॉल्बी सिनेमा ऑडिटोरियम को बहुत जल्द आम लोगों के लिए शुरू किया जाएगा। वहां डॉल्बी विजन और डॉल्बी एटमॉस तकनीक वाली फिल्में भी रिलीज होंगी।
डॉल्बी विजन और डॉल्बी एटमॉस टेक्नोलॉजी क्या है?
डॉल्बी विजन नए जमाने की हाई डायनैमिक रेंज वीडियो तकनीक है। इसे आम भाषा में HDR तकनीक भी कहते हैं। इसकी मदद से पर्दे पर बेहतर पिक्चर क्वॉलिटी दिखती है।
यह तकनीक फिल्म के हर सीन के आधार पर लाइट्स और कलर्स को एडजस्ट करती है जिससे मूवी देखने का एक्सपीरियंस शानदार हो जाता है।
डॉल्बी एटमॉस तकनीक साउंड के लिए है जिसमें ऑब्जेक्ट बेस्ड सराउंड साउंड काम करता है।
आसान भाषा में समझाएं तो पहले के सिनेमाहॉल में आवाज दायें, बायें, आगे और पीछे से आती थी।
डॉल्बी एटमॉस में आवाज ऐसा फील कराती है मानो घटना आपके सामने घट रही हो।
उदाहरण के लिए अगर किसी सीन में आसमान में बादल गरज रहे हैं तो दर्शकों को ऐसा लगेगा कि उनके सिर के ऊपर ऐसा हो रहा है।
उत्तर भारत में एक भी डॉल्बी सिनेमा नहीं
जानकारी के अनुसार, भारत में एक भी डॉल्बी सिनेमा उत्तर भारत में नहीं है। इसे सबसे पहले महाराष्ट्र के पुणे में शुरू किया था। हैदराबाद, त्रिची, बंगलूरू और अब कोच्चि में इसकी शुरुआत हो रही है। डॉल्बी लेबोरेट्रीज के अनुसार, दुनियाभर में 930 से अधिक फिल्में डॉल्बी विजन और डॉल्बी एटमॉस में रिलीज हुई हैं। इनमें कई भारतीय फिल्में जैसे- 'RRR', 'पुष्पा 2: द रूल', 'गेम चेंजर', 'बाहुबली', 'वॉर 2', 'कांतारा', 'राजा साब', 'बॉर्डर 2' आदि शामिल हैं।
क्या कहा कंपनी ने?
डॉल्बी लैबोरेट्रीज के वाइस प्रेसिडेंट (सिनेमा सेल्स और पार्टनर मैनजमेंट), माइकल आर्चर ने कहा कि केरल में डॉल्बी सिनेमा को लाना एक माइलस्टोन है। यहां के लोगों का सिनेमा से गहरा जुड़ाव है। ये लोग स्टोरी और आर्ट की कद्र करते हैं।